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प्रवाह-अप्रैल 2012
पढिये प्रवाह एक नए "परिवर्तन" के साथ | इस महीने के प्रकाशन में हमने अपोजी में हो रही गतिविधियों के पीछे की कहानी पर प्रकाश डालते हुए " अपोजी रिव्यू कमिटी " की बैठक में हुई सभी गतिविधियों को बड़े रोचक अंदाज़ में पेश किया है | इसी के साथ हमने सभी भवन प्रतिनिधियों के वार्षिक कार्यकाल का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है |और अन्य कई खबरों के साथ हिंदी प्रेस परिवार प्रस्तुत करता है प्रवाह- अप्रैल 2012 |
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हॉकी कैम्प और प्राणायाम शिविर
बिट्स के खेल संघ द्वारा आयोजित हॉकी शिविर कल सोमवार, 26 मार्च से जिम-जी प्रांगण में शुरू हो गया है| पहले ही दिन छात्रों की भारी मात्रा देखकर प्रशिक्षक काफ़ी खुश हुए| खेल मैदान में 2011**PS***P से लेकर 2007**PS***P सभी वर्ष के छात्र मौजूद थे| रजिस्ट्रीकरण आदि की औपचारिकताएँ निभाने के पश्चात प्रशिक्षक ने सभी छात्रों से 400 मीटर दौड़ लगवाई और उसके बाद साधारण व्यायाम करवाया| फिर उन्होंने वहाँ मौजूद खिलाड़ियों को हॉकी स्टिक पकड़ना सिखाते हुए सर्वप्रथम 'ड्रिब्लिंग' करने के गुर सिखाये और सभी से इसे दोहराने को कहा| छात्रों ने लगभग आधे घंटे तक इस गुर का अभ्यास किया व टीम के खिलाड़ी उन्हें उनकी गलतियों से अवगत कराते रहे| सभी में खेल के प्रति उत्साह देखते ही बन रहा था| अंत में हॉकी टीम के कप्तान विशाल चुण्डावत ने बताया कि नियमित प्रतिभागियों को शिविर समाप्त होने के बाद प्रमाण-पत्र प्रदान किये जायेंगे| एक हफ़्ते तक चलने वाला यह शिविर बिट्सियन्स में हमारे राष्ट्रीय खेल को बढ़ावा देने की एक अच्छी पहल है| आशा करते हैं कि हमें एक नया 'ध्यानचंद' या ‘धनराज पिल्लई’ ज़रूर मिलेगा|
इसके अतिरिक्त खेल संघ द्वारा ही SAC में प्रातःकाल 6:45 से प्राणायाम एवं ध्यान शिविर भी आयोजित करवाया जा रहा है| दोनों ही शिविर में कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है अतः रुचिकर विद्यार्थी इसका लाभ अवश्य उठाएं|
इसके अतिरिक्त खेल संघ द्वारा ही SAC में प्रातःकाल 6:45 से प्राणायाम एवं ध्यान शिविर भी आयोजित करवाया जा रहा है| दोनों ही शिविर में कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है अतः रुचिकर विद्यार्थी इसका लाभ अवश्य उठाएं|
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हिंदी ड्रामा क्लब -मौन एक मासूम सा....
इस सेमेस्टर की 25 मार्च को हिंदी ड्रामा क्लब बिट्स की जनता के समक्ष रूमानी नाट्य प्रस्तुति ''मौन, एक मासूम सा...'' के साथ आया| एक दर्शक की नज़र से यह नाटक एक ''बॉलीवुड-ड्रामा'' जैसा प्रतीत हुआ| नाटक का नायक 'आकाश' भारतीय आर्मी का एक सैनिक है, जिसकी मुलाक़ात होती है नायिका 'श्रुति' से, उसके दोस्त ‘गुरतेज’ की एक शैतानी के ज़रिये| बाद में पता चलता है कि श्रुति नायक की बहन 'श्वेता' की सहेली है, जो कि कुछ दिन नायक के घर रहेगी| फिर दोनों को एक दूसरे से प्रेम होता है| नायक कार्य के अंतर्गत नागालैंड जाता है और इसी दौरान नायिका दोनों के अलग हो जाने की बात करती है| अंत में हमें यह पता चलता है कि नायिका कैंसर से ग्रस्त है| कहानी में नयेपन की कमी सी नज़र आई परन्तु इसमें किया गया अभिनय प्रसंशनीय रहा| खूबसूरत शायरी का प्रयोग नाटक को और प्रभावी रूप देने में मददगार साबित हुआ| गुरतेज के किरदार ने भी नाटक को रुचिकर बनाये रखा| पिछले नाटक से हाथ लगी निराशा को भुलाकर जनता ने इस बार काफ़ी उत्साह दिखाया और एच.डी.सी. की टीम भी सभी की उम्मीदों पर खरी उतरी| भविष्य में भी उनसे ऐसे ही उम्दा प्रदर्शन की कामना है|
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बिट्स पिलानी का आई.आई.टी. दिल्ली में ज़ोरदार प्रदर्शन

कर्ट्सी : आई.आई.टी ,दिल्ली
बिट्स पिलानी को अपने छात्रों के शानदार प्रदर्शन से एक बार फिर गौरवान्वित महसूस करने का अवसर प्राप्त हुआ है| आई.आई.टी. दिल्ली में 2 से 5 मार्च तक आयोजित खेल प्रतियोगिता में बिट्स की टीमों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है| इस प्रतियोगिता में देश भर से करीब 1000 से भी अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया था| इस मौके पर बिट्स के सभी खिलाड़ियों को पूरे कॉलेज की तरफ़ से ढेर सारी बधाइयाँ और शुभकामनाएं|
गौरतलब है कि पहले आई.टी. बी.एच.यू. न जाने पाने से हमारे खिलाड़ी काफ़ी निराश थे परन्तु फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत और निरंतर अभ्यास जारी रखा और दिल्ली में जाकर बिट्स का नाम रोशन कर दिया| कॉलेज ने इस बार 118 छात्र भेजे थे जिसमें 31 छात्राएँ शामिल थीं| इन सभी के शानदार प्रदर्शन से बिट्स को 1 स्वर्ण, 3 रजत व 3 कांस्य पदक हासिल हुए| राहुल अजमेरा (2007B3A7484P) ने पुरुष डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक तथा अनुभा जैन(2008A5PS443P) ने महिला डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक हासिल किया| इसके अलावा हॉकी और क्रिकेट टीम ने भी रजत पदक जीते|
हॉकी टीम के उप-कप्तान अदनान हुसैन ने आई.आई.टी. दिल्ली में अपनी टीम के रजत पदक जीतने के सफ़र के बारे में हमें बताया | टूर्नामेंट को एक अच्छी शुरुआत देते हुए उनकी टीम ने पहला मैच वेंकी के खिलाफ 1-0 से जीता जिसमें विजयी गोल अदनान ने ही किया था | टीम के गोली नरेन्द्रन आर. ने भी अपने बेहतरीन हुनर के बल पर अनेक गोलों का बचाव किया और टीम को जीत की तरफ़ अग्रसर किया| हालांकि इसके बाद अगले मैच में आई.आई.टी. दिल्ली की टीम ने बिट्स को 4-1 से पराजित किया | तीसरे मैच में एस.आर.सी.सी. के विरुद्ध 2-2 से टाई हुआ था जिसमें दोनों गोल माधव वार्ष्णेय ने किये थे | लेकिन फ़ाइनल में हमारी टीम को आई.आई.टी. दिल्ली से 3-0 से हारकर रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा|
इस रोमांचक सफ़र पर हॉकी के सराहनीय प्रदर्शन के लिए टीम के कप्तान विशाल चुंडावत की इच्छा शक्ति,आत्मविश्वास और आशावादी दृष्टिकोण का बड़ा योगदान रहा| तैयारियों के बारे में पूछने पर अदनान ने हमें बताया कि हमारी टीम को टूर्नामेंट के अभ्यास के लिए जिम-जी में सिर्फ आधा ग्राउंड ही मिला था | इस विषय में टीम के कप्तान विशाल की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि विशाल ने चीफ वार्डेन, डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर के पास कई बार अनुरोध किया कि उनको खेलने के लिए ग्राउंड दिया जाए जिस पर उन्हें शिशु विहार के ग्राउंड में खेलने की अनुमति दी गई लेकिन उस ग्राउंड के भी खेलने लायक स्थिति में न होने के कारण उन्हें आधे ग्राउंड में अभ्यास करना पड़ा | उन्होंने इस जीत का सारा श्रेय खिलाडियों की लगन, कड़ी मेहनत और जोश को दिया|
एथलेटिक्स की कप्तान मेहक बांगर ने बताया कि बिट्स की टीम 3 साल बाद आई.आई.टी. दिल्ली गयी थी| एम.एन.आई.टी. जयपुर, NIT कुरुक्षेत्र, NIT हमीरपुर, आई.आई.टी. रुड़की व दिल्ली के अन्य कॉलेजों से आई टीमों ने काफ़ी कड़ी टक्कर दी और ऐसे में जीत कर हमारी खुशी दुगनी हो गयी|
खिलाड़ियों के मुताबिक़ आई.आई.टी. दिल्ली के खेल के मैदान काफ़ी अच्छे थे | हॉकी और फ़ुटबॉल के मैदानों में फ़्लड-लाइट की भी सुविधा थी| हालाँकि आई.आई.टी. दिल्ली का फेस्ट सुविधाओं के नाम पर बॉसम से कहीं पीछे था| वहाँ 150 से 200 खिलाड़ियों को एक ही हॉल में शरणार्थियों की तरह ठहराया गया था| फेस्ट के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ को आमंत्रित किया गया था| लेकिन कॉलेज के छात्रों में फेस्ट को लेकर कोई ख़ास उत्साह नहीं था |
गौरतलब है कि पहले आई.टी. बी.एच.यू. न जाने पाने से हमारे खिलाड़ी काफ़ी निराश थे परन्तु फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत और निरंतर अभ्यास जारी रखा और दिल्ली में जाकर बिट्स का नाम रोशन कर दिया| कॉलेज ने इस बार 118 छात्र भेजे थे जिसमें 31 छात्राएँ शामिल थीं| इन सभी के शानदार प्रदर्शन से बिट्स को 1 स्वर्ण, 3 रजत व 3 कांस्य पदक हासिल हुए| राहुल अजमेरा (2007B3A7484P) ने पुरुष डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक तथा अनुभा जैन(2008A5PS443P) ने महिला डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक हासिल किया| इसके अलावा हॉकी और क्रिकेट टीम ने भी रजत पदक जीते|
हॉकी टीम के उप-कप्तान अदनान हुसैन ने आई.आई.टी. दिल्ली में अपनी टीम के रजत पदक जीतने के सफ़र के बारे में हमें बताया | टूर्नामेंट को एक अच्छी शुरुआत देते हुए उनकी टीम ने पहला मैच वेंकी के खिलाफ 1-0 से जीता जिसमें विजयी गोल अदनान ने ही किया था | टीम के गोली नरेन्द्रन आर. ने भी अपने बेहतरीन हुनर के बल पर अनेक गोलों का बचाव किया और टीम को जीत की तरफ़ अग्रसर किया| हालांकि इसके बाद अगले मैच में आई.आई.टी. दिल्ली की टीम ने बिट्स को 4-1 से पराजित किया | तीसरे मैच में एस.आर.सी.सी. के विरुद्ध 2-2 से टाई हुआ था जिसमें दोनों गोल माधव वार्ष्णेय ने किये थे | लेकिन फ़ाइनल में हमारी टीम को आई.आई.टी. दिल्ली से 3-0 से हारकर रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा|
इस रोमांचक सफ़र पर हॉकी के सराहनीय प्रदर्शन के लिए टीम के कप्तान विशाल चुंडावत की इच्छा शक्ति,आत्मविश्वास और आशावादी दृष्टिकोण का बड़ा योगदान रहा| तैयारियों के बारे में पूछने पर अदनान ने हमें बताया कि हमारी टीम को टूर्नामेंट के अभ्यास के लिए जिम-जी में सिर्फ आधा ग्राउंड ही मिला था | इस विषय में टीम के कप्तान विशाल की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि विशाल ने चीफ वार्डेन, डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर के पास कई बार अनुरोध किया कि उनको खेलने के लिए ग्राउंड दिया जाए जिस पर उन्हें शिशु विहार के ग्राउंड में खेलने की अनुमति दी गई लेकिन उस ग्राउंड के भी खेलने लायक स्थिति में न होने के कारण उन्हें आधे ग्राउंड में अभ्यास करना पड़ा | उन्होंने इस जीत का सारा श्रेय खिलाडियों की लगन, कड़ी मेहनत और जोश को दिया|
एथलेटिक्स की कप्तान मेहक बांगर ने बताया कि बिट्स की टीम 3 साल बाद आई.आई.टी. दिल्ली गयी थी| एम.एन.आई.टी. जयपुर, NIT कुरुक्षेत्र, NIT हमीरपुर, आई.आई.टी. रुड़की व दिल्ली के अन्य कॉलेजों से आई टीमों ने काफ़ी कड़ी टक्कर दी और ऐसे में जीत कर हमारी खुशी दुगनी हो गयी|
खिलाड़ियों के मुताबिक़ आई.आई.टी. दिल्ली के खेल के मैदान काफ़ी अच्छे थे | हॉकी और फ़ुटबॉल के मैदानों में फ़्लड-लाइट की भी सुविधा थी| हालाँकि आई.आई.टी. दिल्ली का फेस्ट सुविधाओं के नाम पर बॉसम से कहीं पीछे था| वहाँ 150 से 200 खिलाड़ियों को एक ही हॉल में शरणार्थियों की तरह ठहराया गया था| फेस्ट के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ को आमंत्रित किया गया था| लेकिन कॉलेज के छात्रों में फेस्ट को लेकर कोई ख़ास उत्साह नहीं था |
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बिट्स की एक संगीतमय शाम, गुरुकुल के नाम
जो छेड़े थे तूने नगमें उस शाम,
लगा कि गुलाब की कली खिल गयी|
संगीत के मखमली सफ़र पर,
सुरों को अपनी मंज़िल मिल गयी||
3 मार्च की संध्या बेला में जब ऑडिटोरियम के अंदर गुरुकुल के मंझे हुए छात्रों ने सुरों की अद्भुत तान छेड़ी तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे| संगीत के नशे में शाम सराबोर हो उठी और लोगों ने भी सांसारिक जीवन की परेशानियों को भूलकर ऐसी शाम का खूब लुत्फ़ उठाया|
“कॉर्स” के वाद्य गीत “Toss the feathers” पर वायलन के तार छेड़कर गुरुकुल ने इस शाम का आगाज़ किया| तत्पश्चात “माँ”, “इकतारा”, “दर्द-ए-दिल”, “आओगे जब तुम” जैसे गीतों से समां बँध गया| सिद्धार्थ जोशी की आवाज़ में लाता जी और रहमान द्वारा गाया गीत “लुका छुपी” सुनकर श्रोता अभिभूत हो उठे| गायक-गायिका में यदि ताल मेल और बेहतर बैठता तो इस गीत का स्तर और भी ऊपर पहुँच जाता| अनुराग तिवारी की मधुर आवाज़ में “आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे”, गुरुकुल के अग्रज सदस्य कार्तिक द्वारा गाया “आस पास खुदा” और “टशन में”, भास्कर की प्रस्तुति “माँ” तथा रौनक का निभाया गीत “तड़प-तड़प के” इस कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे|
गौरतलब है कि गुरुकुल हमेशा ही अनूठे गानों को सबके सामने पेश करता रहा है और इस बार भी उन्होंने कुछ अलग करने का प्रयास जारी रखा| सिद्धार्थ जोशी ने “तुम जो मिल गए हो” गीत को एकदम ही अलग अंदाज़ में प्रस्तुत किया| “आई बिलीव” नामक एक अंग्रेजी गीत भी इस शाम का हिस्सा था| गुरुकुल ने कार्तिक द्वारा स्वरबद्ध एक गीत भी प्रस्तुत किया जिसे शिउली ने उम्दा तरीके से निभाया| गिटार पर समर्थ और प्रसन्ना, सिंथ पर अभिप्रय तथा गायकों में सिद्धार्थ, समग्र, कार्तिक, रौनक, अनुराग, शिउली, श्रेया आदि ने इस गुरुकुल की संगीतमय संध्या को जीवंत कर दिया| इस कार्यक्रम की सफलता इसी बात से दृष्टिगोचर होती है कि माननीय अमित कुमार वर्मा सर ने गुरुकुल नाइट से लौटकर फेसबुक पर ये टिपण्णी की, “Whether it is the final of a world cup or arrival of our chancellor or a GURUKUL night: it is BITS AUDI where you can really feel the presence of a Bitsian in a true sense...!!!”
लगा कि गुलाब की कली खिल गयी|
संगीत के मखमली सफ़र पर,
सुरों को अपनी मंज़िल मिल गयी||
3 मार्च की संध्या बेला में जब ऑडिटोरियम के अंदर गुरुकुल के मंझे हुए छात्रों ने सुरों की अद्भुत तान छेड़ी तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे| संगीत के नशे में शाम सराबोर हो उठी और लोगों ने भी सांसारिक जीवन की परेशानियों को भूलकर ऐसी शाम का खूब लुत्फ़ उठाया|
“कॉर्स” के वाद्य गीत “Toss the feathers” पर वायलन के तार छेड़कर गुरुकुल ने इस शाम का आगाज़ किया| तत्पश्चात “माँ”, “इकतारा”, “दर्द-ए-दिल”, “आओगे जब तुम” जैसे गीतों से समां बँध गया| सिद्धार्थ जोशी की आवाज़ में लाता जी और रहमान द्वारा गाया गीत “लुका छुपी” सुनकर श्रोता अभिभूत हो उठे| गायक-गायिका में यदि ताल मेल और बेहतर बैठता तो इस गीत का स्तर और भी ऊपर पहुँच जाता| अनुराग तिवारी की मधुर आवाज़ में “आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे”, गुरुकुल के अग्रज सदस्य कार्तिक द्वारा गाया “आस पास खुदा” और “टशन में”, भास्कर की प्रस्तुति “माँ” तथा रौनक का निभाया गीत “तड़प-तड़प के” इस कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे|
गौरतलब है कि गुरुकुल हमेशा ही अनूठे गानों को सबके सामने पेश करता रहा है और इस बार भी उन्होंने कुछ अलग करने का प्रयास जारी रखा| सिद्धार्थ जोशी ने “तुम जो मिल गए हो” गीत को एकदम ही अलग अंदाज़ में प्रस्तुत किया| “आई बिलीव” नामक एक अंग्रेजी गीत भी इस शाम का हिस्सा था| गुरुकुल ने कार्तिक द्वारा स्वरबद्ध एक गीत भी प्रस्तुत किया जिसे शिउली ने उम्दा तरीके से निभाया| गिटार पर समर्थ और प्रसन्ना, सिंथ पर अभिप्रय तथा गायकों में सिद्धार्थ, समग्र, कार्तिक, रौनक, अनुराग, शिउली, श्रेया आदि ने इस गुरुकुल की संगीतमय संध्या को जीवंत कर दिया| इस कार्यक्रम की सफलता इसी बात से दृष्टिगोचर होती है कि माननीय अमित कुमार वर्मा सर ने गुरुकुल नाइट से लौटकर फेसबुक पर ये टिपण्णी की, “Whether it is the final of a world cup or arrival of our chancellor or a GURUKUL night: it is BITS AUDI where you can really feel the presence of a Bitsian in a true sense...!!!”
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इस ताल से ताल मिला
28 जनवरी 2012 को मध्यांश द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम “ताल 2012” हाल ही में कैम्पस का सबसे चर्चित आयोजन रहा| पिछले वर्ष अपनी पहली सांस्कृतिक रात्रि प्रस्तुत करने वाले मध्यांश परिवार ने बहुत कम समय में बिट्सियन जनता का मनोरंजन करने का उपयुक्त माध्यम समझ लिया है| वैस्टर्न, हिप-हॉप, कंटेम्पररी और टपोरी नृत्यों की विविध श्रंखला ने सभी का दिल जीत लिया| हास्य नाटक के रूप में “फ्रस्टापा” ने जहाँ सभी क्लब्स व् डिपार्टमेंट्स पर व्यंग्य कसे वहीं पिछले वर्ष की सफल प्रस्तुति रोडीज़ का स्तर बढ़ाते हुए इस बार रोडीज़ v 2.0 ने हंसी के गुब्बारे छोड़ दिए| तेजस, अनमोल गुप्ता, सुमित बजाज और राहुल मेहता के प्रदर्शन काबिल-ए-तारीफ़ थे| जब हर अगली प्रस्तुति पर इस कार्यक्रम का स्तर बढ़ता दिख रहा था तो जनता ने सोचा, “अब इससे बेहतर क्या?”| परन्तु सभी को आश्चर्यचकित करते हुए जब अंत में सम्पूर्ण मध्यांश परिवार ने अत्यंत प्रचलित गीत “कोलावेरी” पर स्टेज से नीचे उतरकर “फ्लैशमॉब” प्रारंभ की तो पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा| इस कार्यक्रम की सफलता इसी बात से दृष्टिगोचर होती है कि रात्रि के अंत में जनता से कई लोग आकार इस फ्लैश मॉब का हिस्सा बन गए और बेफिक्री के साथ नृत्य करने लगे| यही आशा है कि ऐसी प्रस्तुतियाँ निरंतर बिट्सियन जनता का मनोरंजन करती रहेंगी|
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बिट्समुन
2012
शनिवार 18 फरवरी को तीन दिवसीय बिट्समुन सेमीनार 2012 का उदघाटन अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति में संपन्न हुआ| कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अमरीकी दूतावास के प्रवक्ता एवं सूचना अधिकारी पीटर व्रूमिन ,गेस्ट ऑफ ऑनर बिट्स पिलानी ,पिलानी कैम्पस के निर्देशक प्रो.जी .रघुरामा का बिट्समुन के अध्यक्ष स्वप्निल द्वारा अभिनंदन किया गया| कार्यक्रम के अगले भाग में मुख्य अतिथि ने कुछ समसामयिक, अन्तर्राष्ट्रीय, कूटनीतिक घटनाओं के बारे में चर्चा की| उन्होंने सीरिया में चल रहे घटनाक्रम के अमरीकी और यू.एन.ओ. पक्षों को सबके सामने रखा| व्रूमिन मानते हैं कि विश्व में स्वतंत्रता की कल्पना “पक्षपात रहित सिध्दांतों और उदासीनता” से ही की जा सकती है| इस पर जब एक प्रतिनिधि ने लीबिया और सीरिया मामलो में अमेरिका के परस्पर विरोधाभासी रवैये के बारे में पूछा तो वे यह कहकर कि उन्होंने लीबिया का दौरा नहीं किया है, चलते बने |
इसके पश्चात उपाध्यक्ष अविनाश ने सभी उपस्थित आतिथियों और आगंतुकों का धन्यवाद कहकर तीन दिवसीय सेमीनार कि शुरुआत का ऐलान किया| गौरतलब है कि बिट्समुन का यह इस साल चौथा संस्करण है| इस साल का टाइटल स्पॉन्सर सैम्संग था| विभिन्न कॉलेज से प्रतिनिधि बनकर आये प्रतिभागियों और बिट्सियन्स के लिए स्टॉल्स का इंतज़ाम भी किया था | व्रूमिन 1991 से अमरीकी विदेशसेवा में सक्रिय हैं और अपने कार्यक्षेत्र में अत्यंत दक्ष हैं| सोमालिया, लेबनान , ईराक में अमरीकी अभियानों में देश और यू.एन.ओ. के बीच कड़ी का कार्य कर चुके हैं| व्रूमिन ने हाल ही 2011 में “इन्डस्ट्रीअल कोलेज ऑफ आर्म्ड फोर्सेस” कॉलेज से स्नातक हुए हैं|
इसके पश्चात उपाध्यक्ष अविनाश ने सभी उपस्थित आतिथियों और आगंतुकों का धन्यवाद कहकर तीन दिवसीय सेमीनार कि शुरुआत का ऐलान किया| गौरतलब है कि बिट्समुन का यह इस साल चौथा संस्करण है| इस साल का टाइटल स्पॉन्सर सैम्संग था| विभिन्न कॉलेज से प्रतिनिधि बनकर आये प्रतिभागियों और बिट्सियन्स के लिए स्टॉल्स का इंतज़ाम भी किया था | व्रूमिन 1991 से अमरीकी विदेशसेवा में सक्रिय हैं और अपने कार्यक्षेत्र में अत्यंत दक्ष हैं| सोमालिया, लेबनान , ईराक में अमरीकी अभियानों में देश और यू.एन.ओ. के बीच कड़ी का कार्य कर चुके हैं| व्रूमिन ने हाल ही 2011 में “इन्डस्ट्रीअल कोलेज ऑफ आर्म्ड फोर्सेस” कॉलेज से स्नातक हुए हैं|
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नवीनता और भारतीय अर्थव्यवस्था
भारत धीरे धीरे दुनिया की नवीनता की राजधानी बन रही है| इसी विषय पर राघव नरसाली ने एल टी सी में बिटस्मुन के दौरान भाषण दिया | वो दिन बीत गए जब नयी वस्तुएं प्रयोगशालाओं में ही बनती थी और सिर्फ वही लोग नयी वस्तुएं बनाते थे जो सफ़ेद कोट पहन कर रहते थे|पिछले 10-15 सालों में जुगाड़ ने बहुत प्रगति की है | पश्चिम ने जुगाड़ को अपना लिया है और भारत ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मज़बूत कर ली है| राघव जी ने रीसाइक्लिंग पर जोर डालते हुए कहा कि बिट्स जैसी जगह पर,जहां निर्माण का कार्य चल रहा है ,रीसाइक्लिंग की बहुत आवश्यकता है |राघव नरसाली के साथ वार्तालाप -
एच पी सी-आपको पिलानी और बिट्स पिलानी कैसा लगा?
राघव सर-कोई भी कॉलेज अपने छात्रो से जाना जाता है|बिट्स के छात्र मुझे विचार करने वाले तथा उत्साहित लगे|
एच पी सी-आपमें अर्थशास्त्र की दिलचस्पी कहाँ से पैदा हुई?
राघव सर-मुझमें अर्थशास्त्र में दिलचस्पी पैदा करने वाले मेरे अध्यापक ही थे|मुझे हमेशा से ही नीतियाँ बनाने में दिलचस्पी रही है|मैं देश को कुछ देना चाहता था|
एच पी सी-भारतीय लोग हमेशा से ही जुगाड़ी माने जाते रहे है|लेकिन फिर भी भारत से बहुत कम पेटेंट्स भरे जाते है|इसका कोई मुख्य कारण?
राघव सर-वोह दिन बीत गए जब पेटेंट्स की संख्या देश की उन्नति की पहचान होती थी |अब यह बात विवादास्पद है क्यूंकि भारत जैसे देशो में जहां विकास हो रहा है उनकी कई नवाचार आँखों के नीचे से निकल जाती है|लोगो को पेटेंट्स के बारे में ज्यादा कुछ जानकारी भी नहीं है|
एच पी सी-भारत हाल ही में कई गलत कारणों के चलते सुर्ख़ियों में रहा है|फिर भी पश्चिमी कम्पनियां भारत में निवेश कर रही है|
राघव सर-पश्चिम को भारत के दम पर भरोसा है|भारत के इतिहास में ही हैं गिर कर खड़ा होना |संकट तो आते जाते रहते है|और पश्चिम को भरोसा है कि भारत जैसे बड़े देश में कुछ न कुछ तो चलता रहेगा|
एच पी सी- भारतीयों में ऐसी कौन सी क्षमता है जो हमें जुगादी बनाती है?
राघव सर- सर्वाइवल और कठिनाइयों से डट कर लड़ने की क्षमता भारतियों की सराहनीय है|
एच पी सी-छात्रों के लिए कोई सन्देश|
राघव सर-तुम बच्चे मार्केट में भारत की सबसे अच्छी घडी में उतरोगे| जो मौके आये उन्हें दर दबोचो और हर दिए गए मौके का फायदा लो|
एच पी सी-आपको पिलानी और बिट्स पिलानी कैसा लगा?
राघव सर-कोई भी कॉलेज अपने छात्रो से जाना जाता है|बिट्स के छात्र मुझे विचार करने वाले तथा उत्साहित लगे|
एच पी सी-आपमें अर्थशास्त्र की दिलचस्पी कहाँ से पैदा हुई?
राघव सर-मुझमें अर्थशास्त्र में दिलचस्पी पैदा करने वाले मेरे अध्यापक ही थे|मुझे हमेशा से ही नीतियाँ बनाने में दिलचस्पी रही है|मैं देश को कुछ देना चाहता था|
एच पी सी-भारतीय लोग हमेशा से ही जुगाड़ी माने जाते रहे है|लेकिन फिर भी भारत से बहुत कम पेटेंट्स भरे जाते है|इसका कोई मुख्य कारण?
राघव सर-वोह दिन बीत गए जब पेटेंट्स की संख्या देश की उन्नति की पहचान होती थी |अब यह बात विवादास्पद है क्यूंकि भारत जैसे देशो में जहां विकास हो रहा है उनकी कई नवाचार आँखों के नीचे से निकल जाती है|लोगो को पेटेंट्स के बारे में ज्यादा कुछ जानकारी भी नहीं है|
एच पी सी-भारत हाल ही में कई गलत कारणों के चलते सुर्ख़ियों में रहा है|फिर भी पश्चिमी कम्पनियां भारत में निवेश कर रही है|
राघव सर-पश्चिम को भारत के दम पर भरोसा है|भारत के इतिहास में ही हैं गिर कर खड़ा होना |संकट तो आते जाते रहते है|और पश्चिम को भरोसा है कि भारत जैसे बड़े देश में कुछ न कुछ तो चलता रहेगा|
एच पी सी- भारतीयों में ऐसी कौन सी क्षमता है जो हमें जुगादी बनाती है?
राघव सर- सर्वाइवल और कठिनाइयों से डट कर लड़ने की क्षमता भारतियों की सराहनीय है|
एच पी सी-छात्रों के लिए कोई सन्देश|
राघव सर-तुम बच्चे मार्केट में भारत की सबसे अच्छी घडी में उतरोगे| जो मौके आये उन्हें दर दबोचो और हर दिए गए मौके का फायदा लो|
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बॅडरोक
सी.ई.एल द्वारा आयोजित “ई वीक” के बॅडरोक इवेंट का इंतज़ार सभी काफ़ी बेसब्री से कर रहे थे | इस इवेंट में कुछ छात्रों को कनॉट के पांच रेस्टोरेंट के संचालन का मौका दिया था | वह पांच रेस्टोरेंट थे शर्मा, विजय, वोल्गा, कमल एवं गोल्डेन ड्रैगन | सारे दलों ने लोगों को अपनी ओर खींचने के लिए कई आकर्षक प्रस्ताव रखे थे | वोल्गा में 90 रुपये में वेज थाली मिल रही थी और 625 रूपये की खाने की चीज़ें 360 में मिल रही थीं और साथ ही जितने लोगों का दल खाने आता उन्हें उसके दुगना छूट मिल रही थी| यहाँ अमेरिकन पॉप नामक एक स्पेशल ड्रिंक भी मिल रही थी| गोल्डेन ड्रैगन में 220 रूपये का नॉन वेज और 170 रूपये का वेज बुफ्फे था...इनका स्पेशल मोमो लोगों को काफी भाया | कमल में 125 रूपये में वेज और 225 रूपये में नॉन वेज बुफ़्फे था | शर्मा रेस्टोरेंट में 150 रूपये के बुफ्फे के साथ-साथ खेलों का भी इंतज़ाम था | विजय रेस्टोरेंट में हैप्पी मील 85 और कपल मील 150 रूपये में मिल रहा था |
इन सस्ते दामों का लोगों ने जम कर लुत्फ़ उठाया और सारी शाम कनौट में लोगों का तांता लगा रहा | इतने सारे लोग होने के कारण रेस्टोरेंट के संचालन में थोड़ी दिक्कतें आ रहीं थी, पर छात्रों ने सारी दिक्कतों का अच्छी तरह से सामना किया|
आयोजन समीति के सदस्य गौरव गुप्ता एवं अनुराग प्रसाद से हुई बातचीत से यह जानकारी मिली कि आज कनौट में बिट्सियन जनता ने कुल मिलाकर एक लाख चालीस हज़ार रुपये व्यय किये|. गौरतलब है कि कमल'स ने शुरुआत के एक घंटे में 110 लोगों को आकर्षित किया और 16000 रुपये कमाए, जो कि दूसरे दलों से काफ़ी ज़्यादा था|
यहाँ तक पहुँचने के लिए टीमों को 2 पड़ाव पार करने थे| पहले पड़ाव में उन्हें 4 सवालों के जवाब देने थे जैसे 'अगर खाने में कीड़ा निकल जाये तो या खाना पहुचने में देर लगे तो ऐसी स्थिति में आप ग्राहकों को कैसे समझायेंगे?'| इसमें 5 टीमें चुनी गयी जिन्हें दूसरे पड़ाव में बोली प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा| एक तरफ़ जहाँ सबसे ज़्यादा बोली शर्मा एवं गोल्डेन ड्रैगन के लिए लगायी गयी वहीँ दूसरी तरफ विजय सबसे कम दाम में बिका|
इन सस्ते दामों का लोगों ने जम कर लुत्फ़ उठाया और सारी शाम कनौट में लोगों का तांता लगा रहा | इतने सारे लोग होने के कारण रेस्टोरेंट के संचालन में थोड़ी दिक्कतें आ रहीं थी, पर छात्रों ने सारी दिक्कतों का अच्छी तरह से सामना किया|
आयोजन समीति के सदस्य गौरव गुप्ता एवं अनुराग प्रसाद से हुई बातचीत से यह जानकारी मिली कि आज कनौट में बिट्सियन जनता ने कुल मिलाकर एक लाख चालीस हज़ार रुपये व्यय किये|. गौरतलब है कि कमल'स ने शुरुआत के एक घंटे में 110 लोगों को आकर्षित किया और 16000 रुपये कमाए, जो कि दूसरे दलों से काफ़ी ज़्यादा था|
यहाँ तक पहुँचने के लिए टीमों को 2 पड़ाव पार करने थे| पहले पड़ाव में उन्हें 4 सवालों के जवाब देने थे जैसे 'अगर खाने में कीड़ा निकल जाये तो या खाना पहुचने में देर लगे तो ऐसी स्थिति में आप ग्राहकों को कैसे समझायेंगे?'| इसमें 5 टीमें चुनी गयी जिन्हें दूसरे पड़ाव में बोली प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा| एक तरफ़ जहाँ सबसे ज़्यादा बोली शर्मा एवं गोल्डेन ड्रैगन के लिए लगायी गयी वहीँ दूसरी तरफ विजय सबसे कम दाम में बिका|




